दिल की बात

दिल की बात 


समझो न इस दिल की बात को,

मेरी बातोँ के अन्दर के राज को,

प्यार तुमसे बेहद करता हूँ,

तेरी हर अदा पे मरता हूँ,

इस दुनिया में तू सबसे प्यारी है,

तू ही मेरे सपनो की नारी है,

अरे समझो न इस दिल की बात को,

मेरे रोम-रोम के जज्बात को,

इस प्रेम कहानी को सफल बना दो,

अपने दिल में एक कोना हमे दिला दो,

अरे, अब हर शख्श की यही फ़रियाद है,

इस शाहजहाँ की बस तू ही मुमताज़ है,

समझो इस दिल की बात को,

 मेरी बातोँ के अन्दर के राज को,

मेरी बातोँ के अन्दर के राज को|

लेखक- आयुष कुमार

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काले सूरज का उदय

श्यामदास सरकार: एक कहानी (भाग-2)


काले सूरज का उदय


 

दो साल से बंद था जो आफ़ताब,

वो निकला किसी कारण आज,

हुआ उस दिन कुछ ऐसा कि,

 रंक से राजा बन बैठा वो आज|

 

साल था 1694 और उन दिनों पश्चिम में अला-उद-दीन खिलजी का आतंक बड़ा भयंकर था और सभी उसके इस आतंक के कारण बहुत डरे हुए थे जिसकी वजह से पश्चिम के सभी शासकों ने उसके सामने हथियार डाल दिए थे, अब खिलजी को अपनी रियासत का दायरा बढ़ाने का जूनून सवार था, जिस वजह से उसने अपने कुछ पियादो को हिन्दुस्तान भेज दिए और वह अपने रियासत को बढ़ाने  में जुट गया| इस वक़्त श्यामदास को कैदी बने हुए 1 वर्ष हो चुका था और कैदियों के साथ रहकर उनसे  काफी गुर सीख लिए और कैद में सभी उसको कुछ न कुछ सिखा दिया करते | उसी बीच खिलजी ने लाहौर पर अपना कब्ज़ा जमा लिया और उसी समय  उसका एक पियादा अवध की धरती पर आया और अपने अड़ियल वर्ताब के कारण वह  पकड़ा गया और उसको उसी जेल में डाल दिया गया जिसमे श्यामदास सरकार पहले से मौजूद था और उसके आने के चंद दिनों बाद ही वो पियादा भाग निकला जिससे राजा बड़ा क्रोधित हुआ और उसने उस पियादे को मारने का हुक्म दे दिया और वो दिल्ली के पास ही मार गिराया गया जब उसकी मौत की खबर खिलजी तक पहुंची तब तक बो दिल्ली के तख़्त पर बैठ चुका था और इस खबर को सुनकर वो बौखला गया|

नाम था खिलजी उसका ,

विश्व विजेता बनने का,

सपना था उसका ,

जब मिली खबर उसे,

अपने यार की मौत की,

तो क्रोध का सैलाब आया जो,

अवध नरेश की मौत लाया|

बौखलाए खिलजी ने अवध पर धावा बोल दिया और उसके राजा को उसी बेहरमी से मारा जितना बेरहम वो था, खिलजी को अवध कुछ ज्यादा ही भाया और वह राजमहल घूमने को निकला| घूमते-घूमते वह कारागार में पहुंचा जहाँ से उसका पियादा भागा था, तभी उसने एक आवाज़ सुनी “आज में बाहर निकलूंगा” यह आवाज़ सुनकर खिलजी स्तब्ध हो गया और उसने तुरंत कोषाद्यक्ष को बुलाया और उस आवाज़ के बारे में पूंछा तो उसने जबाब दिया “हुजूर जाने दीजिये बच्चा है” तो खिलजी गुर्राया और बोला “उसकी इतनी गुस्ताखी कि वो खिलजी की कैद से भागने की बात कहे” कोषाद्यक्ष ने उसके पैर पकडे और कहा हुजुर उसे जाने दे उसने आपकी मदद की थी, इसे सुन खिलजी चौंका और उसने आदेश दिया कि उसे दरबार में पेश किया जाए |अगली सुबह उसे दरबार में पेश किया गया तो खिलजी चौंक गया और बोला “इस बच्चे ने मेरी क्या मदद की और फिर जोर-जोर से हसने लगा” तो श्यामदास बोला-

राज़ दफ़न है कई इस जुबान में,

रखा क्या है उम्र वा नाम में ,

था जो मेरे साथ अन्दर गुफा में,

अजीज था वो बड़ा आपको,

कहता था वो आपको हुजूर,

रख लो दो तलवार मयान में|

यह सुन खिलजी चौंका और उसने तुरंत दरबार निष्काषित कर दिया और श्यामदास को अपने आरामगाह में ले गया और पूंछा “कि तुम रहमान को कैसे जानते हो” तो श्यामदास बोला “आपका जो पियादा इस कारागार में था उसने बाताया जब मैंने उसकी मदद की थी”| तभी उसने कोषागार के अध्यछ को बुलाया और उस रात के बारे में पूंछा जिसकी श्यामदास बात कर रहा था,

कोषागार अध्यछ ने बताया की उसने जेल में सुरंग श्यामदास के लिए बनाई थी पर इसने आपके पियादे को उसमे से फरार करवा दिया ये सुनकर खिलजी के मन में और जिज्ञासा उत्पन्न हुई और उसने पूछा कि  “इस लड़के को इतनी कठोर सजा क्यूँ दी गयी थी”| तो श्यामदास खुद बोला “अपने माँ-बाप को मिलाने की सजा दी गयी थी मुझे हुजूर” इसे सुन खिलजी थोडा अचंभित भी हुआ और थोडा परेशान भी और उसने फिर पूंछा “माँ-बाप को मिलाने पर सजा क्यूँ” तो कोषागार अधय्छ बोला “हुजूर-ऐ-आला इसके बाप मर गया था तो इसने अपने माँ-बाप को मिलाने के लिए अपनी माँ को मार डाला”, ये सुनकर खिलजी जोर-जोर से हंसने लगा और बोला “क्या नाम है तेरा ऐ बच्चे” तो वो बोला “जी हुजूर श्यामदास” खिलजी ने पूंछा “क्या तुम मेरे शागिर्द बनोगे” तो श्यामदास बोला “अगर आप हमेशा मुझे साथ रखो तो” खिलजी बोला “बिलकुल मेरे शेर-ऐ-अवध क्यूँ नही”|

अगली सुबह श्यामदास खिलजी से बोला हुजूर मरवा दो इस कोषागार अध्यछ को तो खिलजी ने कुछ सोचा और हुक्म दिया कि लटका दो इस को सूली पर पूरा दरबार सन्न था कि ये क्या हुआ जिसने इन दोनों की मदद की इन्होने उसी को मरवा दिया दरबार में सब चुप थे सिवाय खिलजी और श्यामदास के जो जोर-जोर से हंस रहे थे|

बाहर जनता में जब ये बात फ़ैली तो अला-उद-दीन खिलजी ने दरबार बुलाया और बोला-‘

बदला है अवध का आसमान,

जिसमे हर रंग है काला समान,

मिले है अब राक्षस और हैवान,

जो मिलकर नोचेंगे इंसान,

कहता है आने वाला वक़्त,

अवध का लाल है बड़ा महान,

जो बनाएगा इस अवध को,

इतिहास में दफ़न एक शमशान|

जब इस बात का पता खिलजी के वजीर को लगा तो वो सीधा अवध चला आया और उसने खिलजी से पूंछा “जनाब आपने अपने ही मुलाजिम को मार दिया” तो खिलजी बोला “हम तो आपको समझदार समझते थे पर आप तो बाकियों की तरह आम निकले” ये कहकर खिलजी हँसते हुए चला गया तो पीछे खड़ा हुआ श्यामदास वजीर से बोला|

हूँ मैं बच्चा अभी,

उम्र में कच्चा अभी,

पर जल्द बनेंगे,

मेरे गुलाम सभी|

अगले हफ्ते खिलजी वापस दिल्ली चला गया और अवध की बाघडोर श्यामदास को सौंप गया और दीवान-ऐ-आम में श्यामदास सबसे बोला-

ऐ अवध वालों सुनो जरा गौर से,

नहीं भुला हूँ जुल्म के एक भी पल,

जो किये थे बचपन में तुमने मुझ पर,

तैयार रहो अब तुम सब, क्योंकि

बदलूँगा मैं अब तुम्हारा कल|

खिलजी और श्यामदास बड़े घने मित्र बन चुके थे और उन्होंने मिलकर कुछ ऐसे कारनामे किये जिसकी आप कल्पना भी नही कर सकते उन्होंने समय के उस चक्र को पलट को ही रख दिया और उनकी इन हरकतों की वजह से एक नया कल शुरू हुआ जिसे पड़ेंगे आप इस कहानी के अगले भाग में|

लेखक- आयुष कुमार

Sketch

Sketch


Make me into a sketch,

Or draw me into a patch,

All looks like a blunt scratch,

I am not that faithful,

Who meant you to that grateful,

All looks like a certain snatch,

 Which is some dirty patch,

But it’s your generous talent,

That your scratch made my sketch.

श्यामदास सरकार : एक कहानी (शैतान या भगवान्)

भाग-1

शैतान या भगवान् 

 

अवध में जन्मा एक इंसान,

किया काम उसने बड़ा महान,

नहीं पता था वो क्या,

एक खतरनाक शैतान या,

अपनी दुनिया का भगवान्|

 

श्यामदास सरकार का जन्म 12 जनवरी 1686 में अवध (लखनऊ) में हुआ, पिता का नाम रामदास सरकार और माता का नाम राधा देवी था| रामदास एक मेहनती किसान था, वह अपने परिवार को बड़े अच्छे तरीके से संभाल रहा था| श्यामदास को मिलाकर उसके चार बेटे थे जिनमे से सबसे छोटा बेटा, श्यामदास से 10 साल बड़ा था| रामदास के लिए यह एक बड़ी अजीब बात थी की जिस उम्र में उसे दादा बनना था उस उम्र में वह बाप बन बैठा, पर खेती बाड़ी में व्यस्त होने के कारण उसको इस बात का इतना इल्म न था और उसकी पत्नी राधा जो ज्यादातर समय घर में बिताती थी वो श्यामदास की देखभाल में व्यस्त रहती थी| पर श्यामदास के तीनो बड़े भाई इस ज़िल्लत  के शिकार थे कि उसका एक भाई तब आया जब उसके बड़े भाई की शादी की उम्र हो चली है, उनके सभी दोस्त और पडोसी बड़ा चिढ़ाते और वे शर्मिन्दिगी के कारण वो घर पर भी कुछ न कह पाते शायद यही कारण था कि उन्हें श्यामदास से नफरत सी हो गयी थी और अपने माता पिता के प्रति अब वो सम्मान भी नही रहा था, श्यामदास एक बहुत तेजस्वी लड़का था वो हर चीज़ में बड़ा तेज़ था और सब काम बड़े जल्दी सीखता था पर वो थोडा विलक्षण था वो हर चीज़ अपने तरीके से करता था इससे सब उससे जलने लगे बस उसके माता पिता ही थे जो उसे प्यार करते थे, पर वो प्यार भी ज्यादा दिन नही टिका जब श्यामदास 9 साल का हुआ तो उसके पिता को खेत में एक सांप ने काट लिया जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गयी, जब उसने अपनी माँ से पुछा  की पिताजी कहाँ गये हैं, तो उसकी माँ बोली “ बेटा तुम्हारे पिताजी भगवान के पास गए हैं”| श्यामदास ने आज तक अपने माता-पिता को अलग नहीं देखा था शाम को जब उसकी माँ रो रही थी तो उसने पुछा “माँ आप रो क्यूँ रही हो?” तो राधादेवी बोली “तुम्हारे पिताजी भगवान् के पास चले गये है न इसलिए” श्यामदास को ये बड़ा बुरा लगा की उसके पिताजी उसकी माँ को बिना लिए चले गये तो उसने ठान लिया कि वो अपने माँ-पिताजी को साथ करकर ही रहेगा, इसलिए तीन दिन तक वह सबसे यही पूछता रहा की भगवान् के पास कैसे जाते हैं तो उसे जबाब मिला की जब कोई मर जाता है तो वह भगवान् के पास पहुँच जाता है| इस बात को याद रखकर अपने पिता की मृत्यु के चार दिन के उपरान्त उसने अपनी माँ को सोते समय एक बड़े से पत्थर से मार डाला और चिल्लाया “अब माँ नही रोएगी अब दोनों लोग साथ हैं” जब सब ने ये देखा तो काँप उठे, उसका बड़ा भाई जो कि राज़दरबार में एक दरबान था उसने राजा को जब यह बात बताई तो राजा ने उसे कालकोठरी में फिकवा दिया| वो बिलकुल भी नही डरा वो बड़ा खुश था कि अब उसके माँ-बाप एक साथ थे| दो साल ऐसे ही गुजर गए न उसके भाई उससे मिलने आये न उसने उजाले की एक भी किरण देखी| दो साल बस रोज़ एक सूखी रोटी और जुबान पर एक ही बात “कि मैं बाहर निकलने वाला हूँ” और ये बात कहते-कहते जब थक जाता तो सो जाता और अगला दिन भी ऐसे ही दोहराता| कोषाध्यक्ष थोडा दयालु था इस वजह से, बच्चा होने के कारण उस पर कोड़े नही बरसाता, पर उसकी बात सच हुई दो साल कोई आया जिसने उसकी आवाज सुनी और वो बाहर निकला……

 

राजा की नज़र में था,

एक वेबकूफ इंसान,

था अपने माँ-बाप ,

का इकलौता भगवान्,

पर मार अपनी माँ को,

क्या  बन गया शैतान|  

 

                                                                   कहानी अभी बाकी है……..

 

आयेगी वो सुबह ,

जब होगा,

काले सूरज का उदय|

चाह

शाब तुम बनो,

समां तुम बनो,

मेरी मोहब्बत की,

राह तुम बनो,

पनाह तुम बनो,

दुआ तुम बनो,

इस आशिक की,

चाह तुम बनो।

एक पहल

यह न तो कोई रंगीन या हास्य कविता है, यह एक समाज के लिए सन्देश है जो लोगों की गलत मानसिकता सुधारने में कुछ मदद कर सकता है, मेरा आप लोगों से विनम्र निवेदन है कि अपने आस पास के लोगों को गलत करने से रोकें|


एक पहल 


 

सुन ले जनता कहना हमारा,

बंद कर बलात्कारियों के खिलाफ,

“फाँसी दो-फाँसी दो” का नारा,

कर तू कुछ ऐसा कि,

इसकी नौबत ही न आये,

दो सीख उन्हें ऐसी, कि इस,

कुकर्म की हिम्मत ही न आये,

सीख के नाम पर,

मत सुनाओ लडकी को बाते चार,

जरा अपने बेटे को भी,

कुछ समझाओ यार,

न माने अगर फिर भी,

तो लगाओ थप्पड़ चार,

इस गुनाह का नही कोई एक जिम्मेदार,

चाहे हो वो सरकार या हो परिवार,

दोनों इस गुनाह में है भागीदार,

आज से लो तुम ये प्रतिज्ञा,

इस गुनाह को हम रोकेंगे,

और सबसे पहली पहल,

अपने घर से करेंगे,

अरे तू भी किसी का भाई होगा,

या किसी माँ का बेटा होगा,

कैसा लगेगा तुझको जब,

उनके साथ कुछ ऐसा होगा,

आज से लो ये जिम्मेदारी,

जिधर भी हो जैसी भी हो,

हर जगह सुरक्षित हो नारी,

अगर नहीं भूले ये संदेश हमारा,

तो आने वाले वक़्त में नहीं मिलेगा,

“फाँसी दो-फाँसी दो” का नारा|

 

अगर शब्दों में न समझ आये तो ये विडियो देख लो-     https://www.instagram.com/p/BomRErCn7sC/?utm_source=ig_share_sheet&igshid=1da51lzee28as

विडियो क्रेडिट- star plus, feel crew and RJNaved..

thanks for your precious time….

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